उत्तराखंड कि आवाज (विशाल भारद्वाज)
खरमास को हिंदू धर्म में एक अशुभ महीने के रूप देखा जाता है खरमास के महिने में कुछ ऐसे विशेष कार्यों पर रोक लग जाती है। जिसको अगर व्यक्ति इस दौरान भूलवश कर लेता है। तो व्यक्ति का जीवन तहस नहस और दुर्भाग्य से भर जाता है। इस बार खरमास माह का आरम्भ 15 दिसंबर से हो रहा है, और यह 15 जनवरी 2025 को मकर संक्रांति को समाप्त होगा। तो आइए आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि खरमास क्या है और खरमास माह के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।
क्या है खरमास ?
सनातन धर्म में शास्त्रोंनुसार सूर्य के मीन और धनु राशि में प्रवेश करने से लेकर दोनों राशियों में रहने या गौचर करने कि अवधि को खरमास कहते हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार खरमास साल में दो बार लगता है. पहला खरमास संक्रांति जब सूर्यदेव धनु राशि में प्रवेश करते हैं और दूसरा खरमास मीन संक्रांति के समय यानी सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करने पर लगता है. यह कुल एक माह तक चलता है. इस प्रकार खरमास का प्रारंभ 15 दिसंबर से हो रहा है.

इस बार सूर्य देव 15 दिसंबर 2024 रविवार को 10 बजकर 19 मिनट पर धनु राशि में प्रवेश करेंगे. इस दिन से खरमास की शुरुआत हो जाएगी. जोसूर्य देव के मकर राशि प्रवेश करने के बाद यानी 15 जनवरी 2025 मकर संक्रांति को समाप्त होगी . इस दौरान मांगलिक कार्य (मुंडन, छेदन, गृह प्रवेश,सगाई,शादी विवाह) बंद कर दिए जाते हैं।
खरमास के दौरान क्या नहीं करना चाहिए.
1- शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि खरमास के दौरान व्यक्ति को तामसिक भोजन यानि कि लहसुन, प्याज और मांस-मदिरा से दूर रहना चाहिए। इस दौरान केवल शुद्ध शाकाहारी भोजन करना चाहिए।
2- खरमास के दौरान तांबे के बर्तन में रखे हुए भोजन या फिर पानी का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इस दौरान तांबे के बर्तन में पड़े भोजन का सेवन करने से इसका असर सेहत पर बुरा पड़ता है।
3- खरमास के दौरान मांगलिक कामों की मनाही होती है। इसलिए इन दिनों में मुंडन, छेदन, गृह प्रवेश, शादी विवाह जैसे मांगलिक कार्य बिल्कुल न करें। क्योंकि इन दिनों में किए हुए मांगलिक कार्यों का शुभ फल प्राप्त नहीं होता है।
4- इतना ही नहीं खरमास के दौरान किसी भी नए कार्य, व्यापार की शुरुआत बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि इस दौरान किए गए नये कार्यों में व्यक्ति को सफलता नहीं मिलती है और धन हानि का भी सामना करना पड़ता है।
शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि खरमास के दौरान निर्माण कार्य भी शुरू नहीं करना चाहिए। इस मास में बनाए गए घर में रहने से व्यक्ति को कभी भी सुख-समृद्धि नहीं मिलती है।
5- खरमास के दौरान कोई नई चीज जैसे वाहन, घर, प्लाट, आभूषण आदि बिल्कुल नहीं खरीदना चाहिए। क्योंकि इससे आपको शुभ परिणाम हासिल नहीं होते हैं।
ये तो था खरमास में क्या नहीं करना चाहिए। चलिए अब जानते हैं
खरमास के दौरान क्या करना चाहिए।
1- शास्त्रोंनुसार खरमास के पूरे माह में सूर्य देव की पूजा, आराधना करना शुभ माना गया है। रोजाना सुबह उठकर सूर्य स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य दे और मंत्र जाप करें.
2- खरमास में जप, तप, दान आदि करने से आपके जीवन से सभी प्रकार के कष्ट समाप्त होते हैं और आपको शुभ फलों की प्राप्ति होती है. स महीने पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व होता है. ऐसा करने से आपको पुण्य की प्राप्ति होती है.
3- खरमास में जरूरतमंद लोगों को दान-दक्षिणा देनी चाहिए, इससे सौभाग्य में वृद्धि होती है.
4- खरमास में पूजा-पाठ विशेष रूप से करें और ब्राह्मणों को भोजन जरूर खिलाएं. ऐसा करने से सभी दोषों से छुटकारा मिलता है. खरमास में गाय को हरी घास खिलाएं और मंदिर में पूजा सामग्री भेंट करें. कहा जाता है कि इससे सूर्यदेव की कृपा बनी रहती है.
5- खरमास में भगवान विष्णु की पूजा करने से समस्त पापों का नाश होता है। साथ ही घर में यश-वैभव का आगमन होता है।
