उत्तराखंड की आवाज़
बीजेपी: भ्रष्टाचार का विश्व चैंपियन बनी, जमीर से वजीर तक सब बिकाऊ
व्हाट्सएप पर खूब वायरल हो रहा है यह मैसेज भारतीय जनता पार्टी का भ्रष्टाचारी मैसेज
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का भ्रष्टाचार का काला चेहरा एक बार फिर बेनकाब हुआ है। मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकार की एक आदिवासी मंत्री पर 1000 करोड़ रुपये की घूसखोरी का सनसनीखेज आरोप लगा है, और हैरानी की बात यह है कि खुद प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने इस मामले में रिपोर्ट तलब की है। यह वही बीजेपी है, जो “न खाऊंगा, न खाने दूंगा” का ढोंग रचती रही है, लेकिन हकीकत में यह पार्टी भ्रष्टाचार की दलदल में गले तक डूबी है। मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद से मध्य प्रदेश अब भ्रष्टाचार की मंडी बन चुका है, जहां परिवहन आरक्षक की कार से 55 किलो सोना और 11 करोड़ नकद बरामद होने से शुरू हुआ सफर अब 1000 करोड़ की रिश्वत तक पहुंच चुका है। यह ताजा घोटाला साबित करता है कि बीजेपी न केवल भारत की, बल्कि दुनिया की सबसे भ्रष्ट राजनीतिक पार्टी बन चुकी है।
*मोहन यादव ने प्रदेश को बनाया भ्रष्टाचार की मंडी*
जब से मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभाला है, राज्य भ्रष्टाचार के नए-नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। उनके कार्यकाल की शुरुआत ही सनसनीखेज थी, जब एक परिवहन आरक्षक की कार से 55 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए। यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं था, बल्कि यह उस भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों का प्रतीक था, जो बीजेपी शासित मध्य प्रदेश में पनप रहा है। और अब, एक आदिवासी मंत्री पर 1000 करोड़ रुपये की घूसखोरी का आरोप इस बात का सबूत है कि मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य भ्रष्टाचार की खुली मंडी बन चुका है।
पहले व्यापम घोटाला, जिसने लाखों युवाओं का भविष्य अंधेरे में धकेल दिया, और अब सोने, नकदी, और अरबों की रिश्वत के मामले—मध्य प्रदेश में बीजेपी का शासन भ्रष्टाचार का पर्याय बन गया है। यह वही राज्य है, जहां बीजेपी “विकास” और “आदिवासी कल्याण” के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हकीकत में आदिवासी समाज के हक को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही।
*1000 करोड़ का घोटाला: बीजेपी का असली चेहरा*
इस ताजा मामले में, एक आदिवासी मंत्री, जो समाज के सबसे कमजोर वर्ग का प्रतिनिधित्व करती हैं, पर इतने बड़े पैमाने पर घूसखोरी का आरोप लगना न केवल शर्मनाक है, बल्कि यह बीजेपी की दोहरी नीति को उजागर करता है। एक तरफ, पार्टी आदिवासियों के उत्थान का ढोंग करती है, और दूसरी तरफ, आदिवासी समुदाय से बीजेपी के ही नेता अरबों रुपये की लूट कर रहे हैं। जब पीएमओ को खुद इस मामले में दखल देना पड़ता है, तो यह साफ है कि भ्रष्टाचार बीजेपी की सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंच चुका है।
मोहन यादव के शासन में भ्रष्टाचार का यह सफर परिवहन आरक्षक के 55 किलो सोने से शुरू होकर अब 1000 करोड़ की रिश्वत तक पहुंचा है। यह सवाल उठता है कि क्या मुख्यमंत्री इस भ्रष्टाचार की मंडी के मूक विक्रेता हैं, या फिर उनकी नाकामी ने इसे और बढ़ावा दिया है?
*बीजेपी का भ्रष्टाचार: राष्ट्रीय और वैश्विक रिकॉर्ड*
बीजेपी का भ्रष्टाचार केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। राफेल सौदे में अनिल अंबानी की कंपनी को फायदा पहुंचाने के आरोप हों, या पीएम केयर्स फंड की अपारदर्शिता—राष्ट्रीय स्तर पर भी नरेंद्र मोदी से लेकर तो बीजेपी के छोटे नेताओं तक पर भ्रष्टाचार के अनगिनत आरोप लग चुके हैं। उत्तर प्रदेश में भर्ती घोटाले, मध्यप्रदेश में खनन घोटाले, और गुजरात में जमीन घोटाले—हर बीजेपी शासित राज्य भ्रष्टाचार की कहानी बयां करता है।
वैश्विक स्तर पर भी बीजेपी की साख दागदार है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट्स में भारत में भ्रष्टाचार की स्थिति बद से बदतर हुई है, और इसमें बीजेपी की केंद्र और राज्य सरकारों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जब एक सत्ताधारी पार्टी के अपने ही मंत्री पर इतने बड़े घोटाले का आरोप लगता है, तो यह साफ है कि भ्रष्टाचार बीजेपी के डीएनए में समा चुका है।
*आदिवासी समाज का अपमान*
इस घोटाले का सबसे दुखद पहलू यह है कि यह एक आदिवासी मंत्री से जुड़ा है। आदिवासी समाज, जो पहले से ही सामाजिक और आर्थिक रूप से हाशिए पर है, के लिए यह किसी विश्वासघात से कम नहीं। बीजेपी, जो आदिवासी वोटों के लिए बड़े-बड़े वादे करती है, ने इस मामले में समाज के प्रति अपनी असंवेदनशीलता दिखाई है। अगर यह आरोप सही हैं, तो यह न केवल भ्रष्टाचार, बल्कि आदिवासी समुदाय के साथ धोखा है।
