उत्तराखंड की आवाज़
“चुनावी स्वार्थ के लिए विचारधारा को गिरवी रख देना कैसा आंदोलन?

जनता सवाल कर रही है
एक समय था जब आज़ाद समाज पार्टी और भीम आर्मी भारत एकता मिशन खुले तौर पर सनातन और हिंदू संस्कृति के विरोध में खड़ी दिखाई देती थीं — कांवड़ यात्रा, परंपराएं, मंदिर, धर्म सबकुछ ‘पिछड़ापन’ बताया जाता था। लेकिन आज वही संगठन हरिद्वार की सड़कों पर कांवड़ियों के स्वागत में होर्डिंग-बैनर लगवा रहे हैं।
क्या यह बदलाव जनता की भावनाओं के सम्मान में है या वोटबैंक की मजबूरी में विचारधारा की नीलामी?
आंदोलन जब सच्चाई से हटकर अवसरवाद में बदल जाए, तब वो आंदोलन नहीं, महज़ एक राजनीतिक एजेंडा बनकर रह जाता है।
चंद्रशेखर जी, जनता सब देख रही है। आप अगर कांवड़ियों का सम्मान करते हैं, तो बताइए कि पिछली बार आपने सनातन धर्म और हिंदू परंपराओं पर की गई टिप्पणियों पर माफी कब मांगी?
सच्चाई यही है — जब विचारधारा स्थिर नहीं होती, तब राजनीति दिशाहीन हो जाती है। और दिशाहीन नेतृत्व, समाज को गुमराह करता है।
सन्नी गौतम जिला अध्यक्ष भीम आर्मी जय भीम
