उत्तराखंड की आवाज़
अब बामसेफ के जरिए संगठन को मजबूत करेगी बसपा
उत्तराखंड की आवाज़ देहरादून ,साथीयो , बसपा सरकार बनने के बाद बामसेफ को खत्म कर बामसेफ के निष्ठावान -समर्पित कर्मचारी -अधिकारियों का अपमान क्यों किया था और अब बसपा कौन सी बामसेफ से कौन से संगठन को मजबूत करेगी यह तो आपको देखना है? परंतु बामसेफ के संस्थापक अध्यक्ष मान्यवर काशीराम साहेब के साथ एससी /एसटी ,ओबीसी एवं धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के कर्मचारी -अधिकारियों ने अपने बीवी -बच्चे, सगे -संबंधियों के त्याग और समर्पण के बाद मूल निवासी बहुजन समाज के महापुरुषों के व्यवस्था परिवर्तन के आंदोलन को यहां तक पहुंचाया था। बामसेफ की बदौलत चार -चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रही बसपा सुप्रीमो को जीरो पर आने के बाद अब बामसेफ यानी एससी/ एसटी ,ओबीसी एवं धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के कर्मचारियों की ताकत का एहसास हुआ।
साथियों, विदेशी आर्य ब्राह्मणों की हजारों साल की व्यवस्था के खिलाफ बामसेफ अपने मूल निवासी बहुजन समाज के महापुरुषों के व्यवस्था परिवर्तन के आंदोलन को अपनी पीढ़ी में पहुंचने का संघर्ष कर रही है।
बामसेफ,मूल निवासी बहुजन समाज को ब्राह्मणों की हजारों साल की गुलामी से आजाद कराने का संघर्ष कर रही है और बसपा महापुरुषों के व्यवस्था परिवर्तन के आंदोलन के खिलाफ उन्ही ब्राह्मणों की व्यवस्था को यह कहकर मजबूत कर रही है कि ‘हाथी नहीं गणेश है ब्रह्मा विष्णु महेश है’ ‘सर्वजन हिताय- सर्वजन सुखांत “हम परशुराम की सबसे बड़ी मूर्ति लगाएंगे” “केंद्र की सत्ता में आने के बाद स्वर्णो को भी आरक्षण दूंगी”आदि आदि बातें कहकर मूल निवासी बहुजन समाज के महापुरुषों के आंदोलन का अपमान कर बसपा जीरो पर आ गई है और अब बामसेफ के जरिए संगठन को मजबूत करने की बात की जा रही है। देश का आम आदमी तक जान चुका है बसपा का बामसेफ ब्राह्मणों के कर्मचारियों का संगठन हो सकता है ना की मूल निवासी बहुजन समाज के कर्मचारियों का बामसेफ। अब तो मूल निवासी बहुजन समाज ही समझ सकता है कि कौन से बामसेफ के जरिए कौन से संगठन को मजबूत किया जाएगा।
बामसेफ के कर्मचारी -अधिकारियों का क्या हश्र हुआ है किसी से छुपा नहीं।
(मंथन करने का समय है आपसी गुंथन का नहीं)
भंवर सिंह
उत्तराखंड की आवाज़ देहरादून by GR Jayaswal
