उत्तराखंड की आवाज़
अब पूरे देश में गूंजेगी स्वतंत्रता सेनानी परिवारों की आवाज
उत्तराखंड की आवाज़ ,
देहरादून ,बहुत दिनों बाद आज स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के समूहों में पोस्ट की गई जानकारियां मिलीं, प्रसन्नता हुई कि आखिर सेनानी परिवारों में हलचल तो पैदा हुई। हमारे लिए बहुत कुछ कहा गया, इसे हम शिरोधार्य करते हैं, क्योंकि यदि हमें सेनानी परिवारों के हितों की रक्षा करनी है तो कड़वी दवा तो पीनी ही पड़ेगी। प्रायः राजनीतिक चश्मा को धारण करने वालों ने ही अपने नजरिए से देखने का प्रयास किया है, सभी जानते हैं की रघुवंशी ने जो कुछ कहा है, उसे करके दिखाया भी है और एक बात अवश्य भूल रहे होंगे की रघुवंशी ने यह भी कहा था की *रघुकुल रीति सदा चलि आई, प्राण जाए पर वचन न जाई* अपने अंतिम सांस तक रघुवंशी किसी भी राजनीतिक पद को स्वीकार नहीं करेगा, फिर भी अपनी महत्वाकांक्षाएं संजोए बैठे भाइयों ने कटाक्ष किया है, खुशी है कि समय- समय पर ऐसी चेतावनियां मिलती रहेंगी तो कभी डगमगाएंगे नहीं।
श्री राकेश शास्त्री इंदौर, राकेश शास्त्री ग्वालियर, श्री कमलेश पाण्डेय अल्मोड़ा, श्री महन्थ प्रजापति चौरी चौरा, श्री राजेश सिंह अमेठी, श्री द्विजेंद्र मोहन शर्मा गुवाहाटी, श्री कपूर सिंह दलाल गुरुग्राम, श्री मुरली मनोहर खण्डेलवाल रायपुर, श्री दिवाकान्त झा गोड्डा की पीड़ा काश, हमारे सेनानी परिवारों के भाई-बहन समझ सकें, अब मौन बैठने का समय नहीं है। श्री अजय सीतलानी, श्री भारत भूषण शर्मा, श्री सुनील गुजराती, श्री अनिल सिंह, श्री अरुण प्रताप सिंह, श्री कमल अग्रवाल, श्री विशाल सिंह सौदा, श्री अप्पा साहेब शिंदे, श्री मुन्ना लाल कश्यप, श्री अशोक कुमार सिंह, श्री मोनोतोष दास, श्री गोवर्धन शर्मा, श्री अप्पा राव नवले, श्री रमेश उपाध्याय, श्री शैलेन्द्र शुक्ला, श्री अभिनव शुक्ला, श्री रमेश चंद्र सविता, श्री धवल दीक्षित, श्री सुरेश चंद्र बबेले, श्री ज्ञान सिंह सग्गू, श्री सूर्यमणि विश्वाल, श्रीमती अलका चौहान तथा श्रीमती दीपा दास जैसे ऐसे पराक्रमी योद्धा भाई बहन हैं, जिनका दिन रात एक ही चिन्तन रहता है कि किस तरह सेनानी परिवारों का हित हो सके। वे जानते हैं कि किसी राजनीतिक दल से बंधकर यह कार्य संभव नहीं है। इसी तरह देश के अन्य पराक्रमी योद्धाओं से भी हमारा निवेदन है कि जिस दिन हम राजनीतिक दलों के चश्मे को उतारकर सेनानी परिवारों के हितों का चश्मा धारण कर लेंगे और एकता के सूत्र में बंधकर *हर महीने प्रथम रविवार 10:00 बजे 10 मिनट अपने पूर्वजों के नाम* अभियान के अंतर्गत संगठित होने लगेंगे, हमें कहीं किसी के पास गिड़गिड़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
14-15 सितंबर के हरिद्वार के कार्यक्रम को असफल करने के लिए हमारे शुभचिंतकों ने अपनी पूरी शक्ति झोंक दी, फिर भी हमारे पराक्रमी योद्धाओं ने सेनानी परिवारों के हित का मार्ग अपनाया और यहां से एकता के सूत्र में बंधने का संकल्प लेकर अपने-अपने क्षेत्र में पहुंचे। 6 अक्टूबर महीने का प्रथम रविवार होगा। इस दिन निश्चित रूप से पूरे देश में सेनानी परिवारों की आवाज गूंजेगी।
जैसा कि हमने पहले भी निवेदन किया था कि 5 नवंबर तक हम अपने संगठन के कार्यों से अवकाश में रहेंगे, इस बीच हम अपने पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन करेंगे। इसके बाद कार्यकारिणी की बैठक में जो निर्धारित किया जाएगा, उसके अनुसार आगे की योजनाएं बनाई जाएंगी। अभी तो कार्यक्रम के चित्र तथा वीडियो तैयार करके अपने स्वजनों तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। प्रसन्नता यही है की जो लाइन स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के द्वारा खींची जा चुकी है, हमारे शुभ चिन्तक उसे मिटाने में अपनी ऊर्जा नष्ट करने के बजाय, उससे बड़ी लाइन खींचने का प्रयास करेंगे, ताकि चारों तरफ से सेनानी परिवारों की गूंज सरकारों तक पहुंच सके।
उत्तराखंड की आवाज़ देहरादून
