उत्तराखंड की आवाज़ देहरादून
भाजपा के पक्ष में नहीं मंगलौर के समीकरण
हाजी और काजी के बीच लड़ाई भड़ाना को बाहरी होने का नुकसान।
कांग्रेस और बसपा में होगी टक्कर
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दलितों के ऊपर है जीत किसकी होगी जिधर दलितों का वोट जाएगा जीत हासिल वही करेगा
उत्तराखंड की आवाज़ देहरादून ( BY Gr Jayaswal)
रुड़की। हमें तो अपनों ने मारा गैरों में कहां दम था कश्ती वहां डूबी जहां पानी कम था यह कहावत मंगलौर उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी करतार सिंह भड़ाना पर खड़ी उतर रही है इसका मुख्य कारण भड़ाना के कुछ अपने ही लोगों द्वारा जानबूझकर जनता के साथ अभद्र व्यवहार करना माना जा रहा है कार्यालय पर तैनात भड़ाना की प्रतिनिधि लोगों से सही संवाद स्थापित नहीं कर पा रहे जनता की यही अनदेखी उन पर भारी पड़ सकती है सूत्रों का कहना है कि करतार सिंह भड़ाना जहां-जहां भी चुनाव लड़े जीतने के बाद वहां कभी मुड़कर नहीं देखा यहां जब से मंगलोर सीट अस्तित्व में आई तभी से बसपा व कांग्रेस का वर्चस्व रहा भाजपा यहां तीसरे नंबर की पार्टी रही काजी और हाजी की जीत का मुख्य कारण उनके स्थानीय होना वह जनता के दुख दर्द में शामिल होना रहा है जाट व गुर्जर समाज भी एक दूसरे के धुर विरोधी रहे हैं वहीं मुस्लिम समाज हमेशा भाजपा से किनारा करता रहा है यहां के समीकरण भाजपा के पक्ष में खड़े दिखाई नहीं देते पिछले सभी चुनाव पर गौर किया जाए तो मंगलौर में भाजपा चुनिंदा वोट ही हासिल करती है तथा देहात का वोट बैंक आपस में बट जाता है इसीलिए इस सीट का हमेशा भाजपा के हाथ खाली रहे हैं हालांकि केंद्र व राज्य में भाजपा की सरकार है लेकिन मंगलौर में हाजी और काजी की सरकार चलती है स्थानीय बाजपेई भी उपचुनाव में टिकट की दावेदारी कर रहे थे इसके बावजूद भाजपा ने बाहरी उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारा विधानसभा क्षेत्र के कई गांव में भड़ाना को जनता के विरोध का सामना करना पड़ रहा है स्थानीय वाजपेई भी इस चुनाव में कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हालांकि भड़ाना धनाड़े परिवार से ताल्लुक करते हैं पैसे के बल पर लक्ष्य की ओर बढ़ा जा सकता है लेकिन सब कुछ हासिल नहीं किया जा सकता वही भड़ाना के नजदीकी उनकी लुटिया डूबने में लगे हैं राकेश नामक प्रतिनिधि ने कई लोगों से सीधे बात नहीं की बल्कि कहा कि उनकी सरकार में मजबूत पकड़ है और जीत भी पक्की होगी लेकिन शायद उन्हें यह मालूम नहीं की जीत हार को जनता जनार्दन तय करती है सरकार नहीं वही इस चुनाव में कांग्रेस व बसपा के बीच सीधा मुकाबला होना माना जा रहा है जबकि भाजपा अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ रही है बरहाल कुछ भी हो अभी तक बढ़ाना का चुनाव प्रमाण नहीं चढ़ पाया उनके समर्थक कि उन्हें कमजोर करने में लगे हैं हालांकि भाजपा के बड़े नेता यहां आकर उन्हें संजीवनी देने में जरूर लगे हैं इस चुनाव में भाजपा की जीत अभी कोसों दूर दिखाई दे रही है जीत हार का पता तो मतगणना के बाद ही चल सकेगा।
