उत्तराखंड की आवाज़
उत्तराखंड की आवाज़ देहरादून, अमेरिका में राहुल की धूम, भारत में अंधभक्तों की सिट्टी–पिट्टी गुम
उत्तराखंड की आवाज़ देहरादून
राहुल की यात्रा इन दिनों भारत से बाहर अमेरिका में चल रही है।
यहां राहुल भारतीय डायसपोरा से भारत के मुद्दों पर बात कर रहे हैं।
अमेरिका में स्थित दुनिया के टॉप क्लास यूनिवर्सिटीज में राहुल लेक्चर हो रहा है। बहुत बड़े बड़े लोग राहुल को सुनने पहुंच रहे हैं।
राहुल गांधी नेताप्रतिपक्ष संसद दिल्ली

समानता के नाम पर जिनका जिनकी नानी मर जाती है, जाति जनगणना का नाम सुनकर जिसकी सिटी पट्टी गुम हो जाती है। वही लोग आज राहुल की विदेश यात्रा पर फिर से बौखलाये हुए हैं
पहले अगर नरेंद्र मोदी विदेश जाकर भारत के बारे में उल्टी सीधी बातें न किए होते तो आज राहुल गांधी को विदेश में रह रहे भारतीय लोगों से बात करने की नौबत न आती।
खैर, राहुल ने जिस तरह से देश में समानता, इंसाफ , हर व्यक्ति के हक और अधिकार की बात की, वैसे ही अमेरिका में भी भारत के असली मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं। और यही बात सामंती मानसिकता के लोगों को खल रही है।
राहुल गांधी ने प्रमुखता से इन बातों को रखा 👇
👉 उन्होंने कहा है कि चुनाव नतीजे आने के बाद मोदी और बीजेपी का भय ख़त्म हो गया। यानी भारतीय लोकतंत्र ने तानाशाही को नकार दिया।
👉 राहुल ने RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के सांप्रदायिक मिशन की पोल खोल कर रख दी। ये इसलिए भी जरूरी था, क्योंकि RSS विदेश में रह रहे भारतीय लोगों के मन में राष्ट्रवाद के नाम पर जहर भरने का काम करता है।
👉 राहुल ने भारत में खतरनाक आर्थिक असमानता पर बहुत जरूरी बात की। उन्होंने कहा कि ये सरकार एक प्रतिशत लोगों की जे़बें भर रही है, उन्हें ही देश की सारी संपत्ति सौंपे दे रही है।
👉 राहुल ने BJP सरकार और मोदी द्वारा पूंजीपतियों के सोलह लाख करोड़ माफ़ करने वाली बात कही और किसानों की कर्ज़ माफ़ी को लेकर मीडिया के रवैये पर भी चर्चा की।
👉 राहुल ने भारत और अमेरिका में फैले बेरोज़गारी के संकट के समाधान के लिए चीन की बुनियादी ढांचा मॉडल का समर्थन किया। राहुल ने तर्क और उदाहरण के साथ समझाया कि बिना संसाधन खड़ा किए बेरोजगारी संकट को दूर नहीं किया जा सकता।
राहुल ने ये सारी बातें विदेश में रह रहे भारतीय लोगों से की, भारत के हितैषी नीति निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों से की। राहुल ने मोदी की तरह डोनाल्ड ट्रंप का प्रचार नहीं किया।
राहुल ने अमेरिका के मंच का इस्तेमाल अपनी बात को ग्लोबल स्तर पर मनवाने के लिए किया। यही होता है, राहुल जैसे पढ़े–लिखे और मोदी जैसे अनपढ़ों में फर्क।
अगर इसके बाद भी कोई राहुल की विदेश यात्रा के बारे में भ्रम फैला रहा है तो जरूर RSS की लैब में तैयार किया गया BJP का अंधभक्त होगा।
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