उलटी पड़ गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया . . .!
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शकील अख्तर
प्रधानमंत्री मोदी ने टीवी को दिए एक इंटरव्यू में मुसलमानों से कहा है कि वे बीजेपी के आफिस में घुसकर बैठ जाएं। कौन भगा देगा उन्हें? कब्जा कर लें बीजेपी पर!
बोल दिया मोदी ने। लेकिन यह नहीं बताया कि पहले से जो बीजेपी में थे उनका हाल क्या है? इंटरव्यू लेने वाले एंकरों के तो पूछने का सवाल ही नहीं। वे तो प्यारे प्यारे मीठे मीठे सवाल पूछते हैं और जवाब पर ऐसे चमकृत होते आनंद विभोर होते दिखते हैं जैसे उन्हें किसी ने सृष्टि का रहस्य बता दिया हो। मोदी जी की माताजी जो एक अच्छी उम्र पाकर शांतिपूर्वक गुजरी हों उनके न होने के बारे में सवाल पूछकर खुद को बड़ा योग्य समझते हैं और प्रचार करते हैं कि देखिए मोदी जी किस तरह भावुक हुए। रोने लगे।
कभी राहुल प्रियंका से नहीं पूछा कि उनके पिता जिनका शव टुकड़ों में आया था, जिनकी दादी का सीना गोलियों से छलनी हो गया था उस समय उन पर क्या गुजरी? राजीव गांधी और इन्दिरा गांधी की शहादत पर देश के लिए दी उनकी कुर्बानी पर कभी बात नहीं करते। प्रियंका से पूछते हैं कि आप अपनी बेटी से मिलने क्यों गईं थी। बताइए कोई अपनी बेटी से न मिले? राहुल से तो हर समय यही पूछते हैं कि आपके लिए मोदी ने यह कहा अमित शाह ने यह कहा, फलाने ने यह कहा! राहुल कहते हैं कि भाई कोई सवाल अपनी तरफ से भी पूछ लिया कीजिए। जनता की समस्याओं के सवाल। बेरोजगारी महंगाई पर। मगर नहीं राहुल और प्रियंका के लिए उनके सवाल अलग हैं और मोदी जी के लिए अलग। राहुल प्रियंका के लिए दुनिया के सबसे कड़वे सवाल और मोदी जी के लिए सबसे आसान और मीठे सवाल।
खैर बात हो रही थी प्रधानमंत्री मोदी के मुसलमानों पर बोले उस जवाब पर जिसमें वे कह रहे थे कि मुसलमानों को जबर्दस्ती बीजेपी में आ जाना चाहिए। तो जो आ गए थे। और जिन्होंने पार्टी की सेवा में कभी कोई कसर नहीं रखी वे मुख्तार अब्बास नकवी शाहनवाज हुसैन आजकल कहां हैं? यह सवाल मोदी जी से कौन पूछेगा? नकवी और शाहनवाज तो कभी पूछेंगे नहीं। उन्होंने पूरे मन से बीजेपी की सेवा की है।
नकवी तो जब 16 -17 साल के थे। पढ़ रहे थे। तब से बीजेपी के लिए काम कर रहे हैं। करीब 50 साल हो गए। शाहनवाज को भी 30 – 35 साल हो गए। दोनों आज सांसद भी नहीं हैं। कभी दोनों मंत्री हुआ करते थे। और वे दोनों क्या कोई भी मुसलमान मोदी जी के मंत्रिमंडल में तो क्या भाजपा की तरफ से सांसद भी नहीं है। चुनाव भी नहीं लड़वाया। नहीं तो पहले कश्मीर में भाजपा चुनाव लड़ती थी। वहां की तीन सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार देती थी। मगर अब एक तरफ तो मोदी जी कह रहे हैं कि मुसलमानों को आकर बीजेपी के दफ्तर पर कब्जा कर लेना चाहिए दूसरी तरफ वे जो नकवी और शाहनावज जैसे पार्टी को पूरा जीवन दिए मुसलमान थे उन्हें हर जगह से हटा दिया। कश्मीर में जो मुसलमानों को टिकट देते थे वह भी नहीं दिया। और कहते हैं कि आओ और बीजेपी पर कब्जा कर लो!
पहले यह हिप्पोक्रेसी लगता था पाखंड। मगर अब पेनिक रिएक्शन लगता है घबराहट! मोदी जी के समझ में नहीं आ रहा कि क्या करें? तीन चरणों का चुनाव हो चुका है। हर आकलन यह कह रहा है कि चुनाव पलटता लग रहा है। जिसे मोदी जी चार सौ पार कह रहे थे वह राहुल के शब्दों में 140 से भी नीचे जाता दिख रहा है। मोदी जी का कोई दांव नहीं चल रहा। बल्कि उल्टा पड़ता जा रहा है।
संदेशखाली जिसे मोदी ने चुनाव से पहले सबसे बड़ा मामला बनाने की कोशिश की थी पूरी तरह पलट गया। दो महिलाओं ने साफ कह दिया कि भाजपा नेताओं ने उनके नाम से झूठे मामले दर्ज करवाए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद बंगाल जाकर इस मामले को खूब उठाया। फोन से महिलाओं से बात की। यहां तक की राष्ट्रपति से महिला को मिलवाया गया। संदेशखाली के बहाने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमले किए गए। जो प्रधानमंत्री मणिपुर नहीं गए हों। वहां जैसी वीभत्स घटना तो कहीं हुई नहीं। मानवता शर्मसार हो गई थी। मगर प्रधानमंत्री ने सड़क पर जुलूस के साथ निर्वस्त्र करके घुमाई उन महिलाओं का दर्द कभी नहीं पूछा। अन्तरराष्ट्रीय पदक ओलम्पिक मेडल जीतकर लाईं महिला पहलवानों के साथ यौन दुर्व्यवहार करने वाले भाजपा सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह के बेटे को टिकट दे दिया। उसने कहा था दबदबा रहेगा। और मोदी जी ने उसका दबदबा रहने दिया। मगर संदेशखाली में एक झूठ का पहाड़ खड़ा किया गया। लेकिन अब वह दरकने लगा।
बंगाल में अभी 32 सीटों पर तो वोटिंग होना है। तीन चरणों में केवल दस सीटों पर हुई है। संदेशखाली जिस बशीरहाट सीट का हिस्सा है वहां एक जून को मतदान है। तब तक संदेशखाली का पूरा सच सामने आ चुका होगा। झूठ का पहाड़ पूरी तरह गिर चुका होगा। मोदी जी आशंकित हैं। पेनिक रिएक्शन में वे खुद अपनी सरकार पर हमले करने लगे। घबराहट में कह गए कि अडानी अंबानी के पास काला धन है। उनका तो सबसे बड़ा दावा ही यह था कि नोटबंदी करके देश से काला धन समाप्त कर दिया। अब खुद ही बता रहे हैं कि काला धन किसके पास है।
दूसरी खास बात यह कहकर कि अडानी अंबानी यह पैसा बोरों में भरकर कांग्रेस के पास भेज रहे हैं उन्होंने जनता को यह मैसेज दे दिया कि कांग्रेस, इंडिया गठबंधन आ रहा है। इस बात का कोई महत्व नहीं है कि राहुल ने उनका नाम लिया, नहीं लिया. कब लिया। महत्वपूर्ण यह है कि अडानी अंबानी जो मोदी के खास थे। वे कांग्रेस को पैसा पहुंचा रहे हैं। मोदी ने यह नहीं कहा कि कांग्रेस या इंडिया गठबंधन उनसे मांग रहा है। कहा वे पहुंचा रहे हैं।
मतलब अडानी अंबानी को लग गया कि मोदी जी जा रहे हैं। और मोदी जी को भी लग गया कि इसलिए वे मेरे नियंत्रण से बाहर जा रहे हैं। मोदी जी ने तो कांग्रेस के खाते तक सील कर दिए थे ताकि वे एक पैसा भी नहीं निकाल सकें। लेकिन यह कहकर कि अब अडानी अंबानी पहुंचा रहे हैं उन्होंने बता दिया कि कांग्रेस ताकत में है। पैसा दिया या नहीं यह अलग बात है। मगर सवाल यह है कि पैसा किसको दिया जाता है? ताकतवर को। और जनता ताकतवर को पसंद करती है।
पता नहीं मोदी जी ने क्या सोच कर यह बोला था। या बिना सोचे ही घबराहट में बोल गए। मगर जो भी हो वह उल्टा पड़ गया। बहुत सारे विश्लेषण हैं इसके। मगर जनता में जो गया वह यह कि कांग्रेस इंडिया गठबंधन जीत रहा है। इसलिए अडानी अंबानी उन्हें साधने की कोशिश कर रहे हैं।
वह एक उर्दू के सबसे बड़े शायर जिनके लिए खुद गालिब ने कहा था कि कहते हैं पिछले जमाने में कोई मीर भी था, का मशहूर शेर है कि-
“ उलटी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया
देखा इस बीमारी ए दिल ने आखिर काम तमाम किया! “
बहुत बड़ा शेर है। सब उपाय ( तदबीरें) उलटे पड़ गए। दवा बेअसर। और खेल खतम! काम तमाम! आम बोलचाल में इसे ही कहते हैं कि दवा दारू कुछ भी असर नहीं कर रही। सब बेकार।
