बहुजन क्रांति मोर्चा, भारत मुक्ति मोर्चा, भारतीय बौद्ध महासभा आदि संगठनों के कार्यकर्ताओं ने महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम सिटी मजिस्ट्रेट महोदया के प्रतिनिधि को ज्ञापन दिया
बहुजन क्रांति मोर्चा, भारत मुक्ति मोर्चा, भारतीय बौद्ध महासभा आदि संगठनों के कार्यकर्ताओं ने महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम सिटी मजिस्ट्रेट महोदया के प्रतिनिधि को ज्ञापन दिया
हरिद्वार भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय वामन मेश्राम जी के नेतृत्व में बुद्धिस्ट इंटरनेशनल नेटवर्क के बैनर पर भारत के 31 राज्यों के 567 जिलों में महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन के तहत देशव्यापी चरण बंद आंदोलन की कड़ी में बहुजन क्रांति मोर्चा, भारत मुक्ति मोर्चा, भारतीय बौद्ध महासभा आदि संगठनों के कार्यकर्ताओं ने महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम सिटी मजिस्ट्रेट महोदया के प्रतिनिधि को ज्ञापन दिया ।
बहुजन क्रांति मोर्चा के प्रदेश संयोजक भंवर सिंह ने ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कहा कि जब मंदिरों ,मस्जिदों ,गुरुद्वारों आदि में कोई दूसरे धर्म का पुजारी नहीं होता तो फिर महाबोधि महाविहार पर विदेशी ब्राह्मण कब्जा क्यों किए हुए हैं?
भंवर सिंह ने कहा कि ब्राह्मणों ने महाबोधि महाविहार टेंपल एक्ट 1949 बनाकर महाबोधि महाविहार पर ब्राह्मणों का नाजायज कब्जा कराया है।
ब्राह्मणों ने वैदिक धर्म ग्रंथो में मगध प्रांत को (जिसमें बोधगया स्थित है) अपवित्र कहा है और इतना ही नहीं पद्म पुराण में तो बुद्ध का चेहरा देखना ही पाप माना गया है और शंकराचार्य के अनुयायियों को उनके धर्म ग्रंथ के अनुसार वहां जाना ही माना है।
श्याम सुंदर आदित्य ने कहा कि महाबोधि महाविहार के विवाद पर 1895 में जस्टिस मेक जेफरसन जी ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा है कि महाबोधि महाविहार यह मूलतः बौद्ध का पवित्र स्थल है।
इसलिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठन बुद्धिस्ट इंटरनेशनल नेटवर्क के माध्यम से मूल निवासी बहुजन समाज के बुद्धिजीवी वर्ग, छात्र ,महिलाएं एवं उपासक- उपासिकाएं तथा संमविचारी संस्था ,संगठन महाबोधि महाविहार को ब्राह्मणों से मुक्त कराने लिए चरण बंद आंदोलन करने पर बाध्य है।
जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी ।
ज्ञापन देने वालों में भंवर सिंह, नाथू सिंह, रफल पाल सिंह, महिपाल सिंह, श्याम सुंदर आदित्य, रमेश चंद, दीपक, रामनिवास आदि शामिल थे