उत्तराखंड की आवाज
देहरादून, प्रदेश की लगभग 7 हजार बीघा सरकारी जमीन को UIIDB के माध्यम से व्यावसायिक उपयोग और नीलामी की दिशा में ले जाने की सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है, नेताप्रतिपक्ष

प्रदेश की लगभग 7 हजार बीघा सरकारी जमीन को UIIDB के माध्यम से व्यावसायिक उपयोग और नीलामी की दिशा में ले जाने की सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है ।
सरकारी जमीन भाजपा या किसी सत्ताधारी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है। यह उत्तराखंड की जनता की साझा धरोहर है। जनता की जमीन पर फैसला बंद कमरों में बैठकर कुछ चुनिंदा लोगों के हित में नहीं किया जा सकता।
प्रदेश में एक ओर सरकार रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन, महंगाई और मूलभूत सुविधाओं जैसे गंभीर सवालों पर जनता को जवाब देने में विफल है, वहीं दूसरी ओर हजारों बीघा बेशकीमती सरकारी जमीन को व्यावसायिक हितों के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है।
जमीन के व्यावसायीकरण के नाम पर सत्ता के करीबियों और चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की पटकथा तैयार की जा रही है?
7 हजार बीघा जमीन कोई मामूली संपत्ति नहीं है। उत्तराखंड जैसे सीमित भू-संसाधनों वाले राज्य में इतनी बड़ी सरकारी भूमि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस जमीन का उपयोग स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, विश्वविद्यालय, खेल सुविधाओं, सरकारी संस्थानों, रोजगारपरक परियोजनाओं और जनहित की अन्य योजनाओं के लिए किया जा सकता है।
“उत्तराखंड की जमीन पर पहला अधिकार उत्तराखंड की जनता का” है ।भाजपा सरकार को यह समझना होगा कि उत्तराखंड केवल जमीन का टुकड़ा नहीं है। यहां की जमीन, जंगल, जल और प्राकृतिक संसाधन इस प्रदेश की पहचान और आने वाली पीढ़ियों की पूंजी हैं।
राज्य में स्थानीय लोग जमीन, रोजगार और पलायन की समस्या से जूझ रहे हैं, वहां हजारों बीघा सरकारी जमीन के व्यावसायिक इस्तेमाल का फैसला स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस किसी भी कीमत पर सरकारी संपत्ति की संभावित बंदरबांट नहीं होने देगी। यदि सरकार ने जनता की जमीन को निजी हितों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की तो कांग्रेस पार्टी इसका हर स्तर पर विरोध करेगी।
भाजपा सरकार को बताना होगा कि 7 हजार बीघा सरकारी जमीन के पीछे आखिर किसका हित छिपा है। कांग्रेस जनता की जमीन की चौकीदार है और इस मुद्दे को सड़क से सदन तक पूरी ताकत के साथ उठाया जाएगा।”
सरकार को इस मामले में तत्काल पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करनी होगी और जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी होगी। अन्यथा कांग्रेस पार्टी प्रदेशव्यापी स्तर पर इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ जनआंदोलन खड़ा करेगी।
उत्तराखंड की बेशकीमती सरकारी जमीन को किसी भी कीमत पर ‘बिकाऊ माल’ नहीं बनने दिया जाएगा। जनता की संपत्ति की रक्षा करना कांग्रेस की जिम्मेदारी है और इसके लिए सड़क से सदन तक निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।
